SANATANI
Traditional · Stotra · 7 verses
अर्जुन उवाच
अर्जुनने पूछा—केशव! मनुष्य बार-बार एक हजार नामोंका जप क्यों करता है? आपके जो दिव्य नाम हों, उनका वर्णन कीजिये॥ १॥
श्रीभगवानुवाच
श्रीभगवान् बोले—अर्जुन! मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन, जनार्दन, गोविन्द, पुण्डरीकाक्ष, माधव, मधुसूदन, पद्मनाभ, सहस्राक्ष, वनमाली, हलायुध, गोवर्धन, हृषीकेश, वैकुण्ठ, पुरुषोत्तम, विश्वरूप, वासुदेव, राम, नारायण, हरि, दामोदर, श्रीधर, वेदाङ्ग, गरुडध्वज, अनन्त और कृष्णगोपाल—इन नामोंका जप करनेवाले मनुष्यके भीतर पाप नहीं रहता। वह एक करोड़ गो-दान, एक सौ अश्वमेधयज्ञ और एक हजार कन्यादानका फल प्राप्त करता है। , तथा तिथिको और प्रतिदिन सायं-प्रात: एवं मध्याह्नके समय इन नामोंका स्मरणपूर्वक जप करनेवाला पुरुष सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त हो जाता है2, 3, 4, 5, 6, 7
इति श्रीकृष्णार्जुनसंवादे श्रीविष्णोरष्टाविंशतिनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्।
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