SANATANI
Aditya Hridaya tradition · Stotra · 13 verses
जो जगत्के एकमात्र नेत्र (प्रकाशक) हैं; संसारकी उत्पत्ति, स्थिति और नाशके कारण हैं; उन वेदत्रयीस्वरूप, सत्त्वादि तीनों गुणोंके अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश नामक तीन रूप धारण करनेवाले सूर्यभगवान्को नमस्कार है
जो प्रकाश करनेवाला, विशाल, रत्नोंके समान प्रभावाला, तीव्र, अनादिरूप और दारिद्र्यदुःखके नाशका कारण है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जिनका मण्डल देवगणोंसे अच्छी प्रकार पूजित है; ब्राह्मणोंसे स्तुत है और भक्तोंको मुक्ति देनेवाला है; उन देवाधिदेव सूर्यभगवान्को मैं प्रणाम करता हूँ और वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जो ज्ञानघन, अगम्य, त्रिलोकीपूज्य, त्रिगुणस्वरूप, पूर्ण तेजोमय और दिव्यरूप है, वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जो सूक्ष्म बुद्धिसे जाननेयोग्य है और सम्पूर्ण मनुष्योंके धर्मकी वृद्धि करता है तथा जो सबके पापोंके नाशका कारण है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जो रोगोंका विनाश करनेमें समर्थ है, जो ऋक्, यजु और साम—इन तीनों वेदोंमें सम्यक् प्रकारसे गाया गया है तथा जिसने भूः, भुवः और स्वः—इन तीनों लोकोंको प्रकाशित किया है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
वेदज्ञाता लोग जिसका वर्णन करते हैं; चारणों और सिद्धोंका समूह जिसका गान किया करता है तथा योगका सेवन करनेवाले और योगीलोग जिसका गुणगान करते हैं; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जो समस्त जनोंमें पूजित है और इस मर्त्यलोकमें प्रकाश करता है तथा जो काल और कल्पके क्षयका कारण भी है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जो संसारकी सृष्टि करनेवाले ब्रह्मा आदिमें प्रसिद्ध है; जो संसारकी उत्पत्ति, रक्षा और प्रलय करनेमें समर्थ है; और जिसमें समस्त जगत् लीन हो जाता है, वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जो सर्वान्तर्यामी विष्णुभगवान्का आत्मा तथा विशुद्ध तत्त्ववाला परमधाम है; और जो सूक्ष्म बुद्धिवालोंके द्वारा योगमार्गसे गमन करनेयोग्य है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
वेदके जाननेवाले जिसका वर्णन करते हैं; चारण और सिद्धगण जिसको गाते हैं; और वेदज्ञलोग जिसका स्मरण करते हैं; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जिनका मण्डल वेदवेत्ताओंके द्वारा गाया गया है; और जो योगियोंसे योगमार्गद्वारा अनुगमन करनेयोग्य हैं; उन सब वेदोंके स्वरूप सूर्यभगवान्को प्रणाम करता हूँ; और वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे
जो पुरुष परम पवित्र इस मण्डलाष्टकस्तोत्रका पाठ सर्वदा करता है; वह पापोंसे मुक्त हो, विशुद्धचित्त होकर सूर्यलोकमें प्रतिष्ठा पाता है
इति श्रीमदादित्यहृदये मण्डलाष्टकं सम्पूर्णम्।
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