SANATANI
Swami Brahmananda · Stotra · 9 verses
आर्त देवताओंने जिनकी वन्दना की है, जो सूर्यवंशको आनन्दित करनेवाले हैं तथा जिनके ललाटपर चन्दन सुशोभित है, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जो मुनिराज विश्वामित्रका यज्ञ सम्पन्न करानेवाले, पाषाणरूपा अहल्याका कष्ट निवारण करनेवाले तथा श्रीशंकरका महान् धनुष तोड़नेवाले हैं, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जो अपने पिताके वचनोंका पालन करनेवाले, तपोवनमें विचरनेवाले और हाथोंमें धनुष धारण करनेवाले हैं, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जिन्होंने मायामृगपर बाण छोड़ा था, जटायुको मोक्ष प्रदान किया था तथा कपिराज बालीको विद्ध किया था, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जिन्होंने वानरोंके साथ मित्रता की, समुद्रका पुल बाँधा और रावणके वंशका विनाश किया, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जो अति दीन देवताओंको प्रसन्न करनेवाले, वानरोंकी इच्छित कामनाओंको पूर्ण करनेवाले और अपने बन्धुओंका शोक शान्त करनेवाले हैं, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जो शत्रुहीन (निष्कण्टक) राज्यके पालक, प्रजाजनकी भीतिके भक्षक और मोहकी निवृत्ति करनेवाले हैं, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जिन्होंने सम्पूर्ण पृथ्वीका भार हरण किया है, जो सकल नगरनिवासियोंको अपने धामको ले गये तथा जो संसाररूप अन्धकारके लिये सूर्यरूप हैं, उन परमेश्वर रामको मैं नमस्कार करता हूँ
जो पुरुष इस रामाष्टकको एकाग्रचित्तसे निरन्तर पढ़ता है, उसे संसारजनित भयकी प्राप्ति नहीं होती
इति श्रीपरमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीरामाष्टकं सम्पूर्णम्।
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