SANATANI
Amaradasa · Stotra · 9 verses
जो ज्ञानस्वरूप हैं, जगत्का धारण-पोषण करनेवाले हैं, परमसुखके दाता हैं, जिनका शरीर सबको पवित्र करनेवाला है, मुनीन्द्र, योगीन्द्र, यतीश्वर, देवेश्वर और हनुमान् जिनकी सदा सेवा करते हैं, जो पूर्ण हैं, सीताजी जिनकी अर्द्धांगिनी हैं; जो देवताओंके भी गुरु हैं; वे लक्ष्मीपति भगवान् श्रीरामचन्द्रजी मेरे चित्तमें सदा रमण करें
जो मुकुन्द, गोविन्द नामसे कहे जाते हैं, सीताजीने जिनके चरणोंका लालन किया है, [जिनका भजन करनेसे] नीच कुलमें उत्पन्न शबरी भी जिनके परमधामको प्राप्त हो गयी, जो विमल बुद्धिवालोंकी भी वाणीके परे हैं और वेदोंके वचनसे भी अगम्य हैं; वे लक्ष्मीपति भगवान् श्रीरामचन्द्रजी मेरे चित्तमें सदा रमण करें
जो पृथ्वीके अधीश्वर हैं, श्रेष्ठ देवताओं और मनुष्योंके भी स्वामी हैं, रघुकुलके नाथ हैं, जिन्होंने सिरपर मुकुट और बाहुओंमें केयूर धारण किये हैं, जो सोनेके समान पीतवर्ण (वस्त्र पहने हुए) हैं, जिनका शरीर शोभित हो रहा है और जो सैकड़ों सूर्यके समान देदीप्यमान सिंहासनपर बैठे हुए हैं; वे लक्ष्मीपति भगवान् श्रीरामचन्द्रजी शान्त हृदयवाले मेरे चित्तमें सदा रमण करें
जो श्रेष्ठ हैं, शरण देनेवाले हैं, सुग्रीवके मित्र हैं, अन्तसे रहित हैं, जिनके ललाटमें केशरका तिलक है, जिनकी चाल अति सुन्दर है, मुखारविन्द चन्द्रमाके समान आनन्ददायी है, जो मनुष्यरूपमें प्रतीत होनेपर भी राम (योगियोंके ध्येय परब्रह्म) हैं, यतीश्वरगण जिनकी स्तुति करते हैं, जो जन्म-मृत्युरूप संसारके हरनेवाले हैं; वे लक्ष्मीपति भगवान् श्रीरामचन्द्र मेरे चित्तमें सदा रमण करें
काशीमें भगवान् शंकर जिनके कल्याणप्रद नामका [मुमूर्षु प्राणियोंको] उपदेश करते हैं, श्रीपार्वतीजी प्रतिदिन प्रभात-कालमें जिनके सहस्र-नामका पाठ करती हैं, शिव, ब्रह्मा आदि (देवगण) अपने-अपने लोकोंमें जिनके दिव्य चरित्रका गान करते हैं, वे लक्ष्मीपति भगवान् श्रीरामचन्द्र मेरे चित्तमें सदा रमण करें
जो अत्यन्त धीर होकर भी अधीर (अविद्याको दूर करनेवाले) हैं, असुर (सूर्य) के कुलमें उत्पन्न होकर भी असुर (राक्षसकुल) का संहार करनेवाले हैं, परमात्मा हैं, सर्वज्ञ हैं, मनुष्य तथा देवतागण जिनके सुयशका गान करते हैं, जिन्होंने अहल्याके शापका नाश किया, जिनके हाथमें बाण शोभित है, जो सरल स्वभाववाले और विश्वामित्रके मित्र हैं, वे लक्ष्मीपति भगवान् श्रीरामचन्द्र मेरे चित्तमें सदा रमण करें
जो हृषीकेश, शौरि, शेषशायी, मधुसूदन, उपेन्द्र, वैकुण्ठ आदि नामसे कहे जाते हैं, जिन्होंने प्रसन्न होकर गजराजके शत्रु (ग्राह) का नाश किया, जो बलिको पदच्युत करनेवाले हैं, वीर हैं, वे नीतिनिपुण, लक्ष्मीपति, दशरथनन्दन, भगवान् श्रीरामचन्द्र मेरे चित्तमें सदा रमण करें
जो कवि (त्रिकाल-दर्शी) हैं, लक्ष्मणजीके पूज्य हैं, जिन्होंने वनमें भ्रमण करते हुए मायामृग (मारीच) का वध किया है, जो युद्धप्रिय हैं, दान्त (मन और इन्द्रियोंका दमन करनेवाले) हैं, पृथ्वीके भारको हरनेवाले तथा देवताओंसे स्तुत हैं, जो स्वयं मानरहित होकर दूसरोंके सम्मानके ज्ञाता (कृतज्ञ) हैं, सब लोगोंके पूज्य हैं, सबके हृदयमें निवास करनेवाले हैं, वे लक्ष्मीपति भगवान् श्रीरामचन्द्र मेरे चित्तमें सदा रमण करें
जो मनुष्य प्रातःकाल भक्ति और श्रद्धाके साथ अमरदास कविके बनाये हुए इस सुन्दर रामस्तोत्रका पाठ करेगा, वह बहुत शीघ्र ही तापजनक जन्म-मृत्युके भयका परित्याग कर श्रेष्ठ तथा कल्याणप्रद रघुनाथके पदको प्राप्त करेगा
इति श्रीमद्रामदासपूज्यपादशिष्यश्रीमद्धंसदासशिष्येणामरदासाख्यकविना विरचितं श्रीरामचन्द्राष्टकं समाप्तम्।
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