SANATANI
Goswami Tulsidas · Stotra · 6 verses
भक्तोंके हितकारी, कृपालु और अतिकोमल स्वभाववाले! आपको मैं नमस्कार करता हूँ। जो निष्काम पुरुषोंको अपना धाम देनेवाले हैं ऐसे आपके चरण-कमलोंकी मैं वन्दना करता हूँ। जो अति सुन्दर श्याम शरीरवाले, संसार-समुद्रके मन्थनके लिये मन्दराचलरूप, खिले हुए कमलके-से नेत्रोंवाले तथा मद आदि दोषोंसे छुड़ानेवाले हैं
जिनकी भुजाएँ लंबी-लंबी और अति बलिष्ठ हैं, जिनके वैभवका कोई परिमाण नहीं है, जो धनुष, बाण और तरकश धारण किये हैं, त्रिलोकीके नाथ हैं, सूर्यकुलके भूषण हैं, शंकरके धनुषको तोड़नेवाले हैं, मुनिजन तथा महात्माओंको आनन्दित करनेवाले हैं, दैत्योंका दलन करनेवाले हैं, कामारि श्रीशंकरजीसे वन्दित हैं, ब्रह्मा आदि देवगणोंसे सेवित हैं, विशुद्ध बोधस्वरूप हैं, समस्त दोषोंको दूर करनेवाले हैं, श्रीलक्ष्मीजीके पति हैं, सुखकी खानि हैं, संतोंकी एकमात्र गति हैं तथा शचीपति इन्द्रके प्यारे अनुज (उपेन्द्र) हैं; हे प्रभो! ऐसे आपको मैं नमस्कार करता हूँ और सीताजी तथा भाई लक्ष्मणके साथ आपको भजता हूँ2, 3
जो लोग मद-मत्सरादिसे रहित होकर आपके चरणोंको भजते हैं, वे फिर इस नाना वितर्क-तरंगावलिपूर्ण संसार-सागरमें नहीं पड़ते तथा जो एकान्तसेवी महात्मागण अपनी इन्द्रियोंका संयम करके प्रसन्नचित्तसे भवबन्धविमोचनके लिये आपका भजन करते हैं, वे अपने अभीष्ट पदको पाते हैं
जो अति निरीह, ईश्वर और सर्वव्यापक हैं, जगत्के गुरु, नित्य, जाग्रदादि अवस्थात्रयसे विलक्षण और अद्वैत हैं, केवल भावके भूखे हैं, कुयोगियोंको दुर्लभ हैं, अपने भक्तोंके लिये कल्पवृक्षरूप हैं तथा सम (पक्षपातरहित) और सदा सुखपूर्वक सेवन करनेयोग्य हैं, ऐसे उन (आप) अद्भुत प्रभुको मैं भजता हूँ
अनुपम रूपवान् राजराजेश्वर जानकीनाथको मैं प्रणाम करता हूँ। मैं आपकी बार-बार वन्दना करता हूँ; आप मुझपर प्रसन्न होइये और मुझे अपने चरण-कमलोंकी भक्ति दीजिये। जो मनुष्य इस स्तोत्रका आदरपूर्वक पाठ करेंगे, वे आपके भक्ति-भावसे भरकर आपके निज पदको प्राप्त होंगे, इसमें कोई सन्देह नहीं
इति श्रीमद्गोस्वामितुलसीदासकृता श्रीरामचन्द्रस्तुतिः सम्पूर्णा।
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