SANATANI
Varavaramuni Swami · Stotra · 16 verses
प्रशंसनीय गुणोंके सागर कौशलेन्द्र श्रीरामचन्द्रजीका मंगल हो, चक्रवर्ती राजा दशरथके पुत्र मण्डलेश्वर श्रीरामचन्द्रजीका मंगल हो
जो वेद-वेदान्तोंके ज्ञेय हैं, मेघके समान श्याममूर्तिवाले हैं और पुरुषोंमें जिनका स्वरूप अत्यन्त मनोहर है, उन पुण्यश्लोक (पवित्र यशवाले) श्रीरामचन्द्रजीका मंगल हो
जो विश्वामित्र ऋषिके प्रिय और राजा जनकके भाग्योंके फलस्वरूप हैं, उन भव्यरूपवाले श्रीरामचन्द्रजीका मंगल हो
जो सदा पिताकी भक्ति करनेवाले हैं, जो अपने भ्राताओं और सीताजीके साथ सुशोभित होते हैं और जिन्होंने समस्त लोकको आनन्दित किया है, उन श्रीरामभद्रका मंगल हो
जिन्होंने अयोध्या-निवासको छोड़कर चित्रकूटपर विहार किया और जो सब यतियोंके सेव्य हैं, उन धीरोदय श्रीरामभद्रका मंगल हो
लक्ष्मण तथा जानकीजी सदा भक्तिपूर्वक जिनकी सेवा करते हैं, जो धनुष-बाण और तलवारको धारण किये हुए हैं, उन मेरे स्वामी श्रीरामभद्रका मंगल हो
जिन्होंने दण्डकवनमें निवास किया है, जो खर-दूषणके शत्रु हैं और अपने भक्त गृध्रराजको मुक्ति देनेवाले हैं, उन श्रीरामभद्रका मंगल हो
जो आदरसहित शबरीके भी दिये हुए फल-मूलके अभिलाषी हुए, जो सुलभतासे पूर्ण (अर्थात् थोड़े ही परिश्रमसे प्राप्य) हैं और जिनमें सत्त्वगुणका आधिक्य है, उन श्रीरामभद्रका मंगल हो
जो हनुमान्जीसे युक्त हैं, हरीश (सुग्रीव) के अभीष्टको देनेवाले हैं और बालिको मारनेवाले हैं, उन महाधीर श्रीरामभद्रका मंगल हो
जो सेतु बाँधकर समुद्रको लाँघ गये और जिन्होंने राक्षसराज रावणपर विजय पायी, उन रणधीर श्रीमान् रघुवीरका मंगल हो
जिन्होंने प्रसन्नतासे विभीषणको उनका अभीष्ट लंकाका राज्य दे दिया और जो सब लोकोंको शरणमें रखनेवाले हैं, उन श्रीराघव रामभद्रका मंगल हो
वनसे दिव्य नगरी अयोध्यामें आनेपर जिनका सीताजीके सहित राज्याभिषेक हुआ, उन महाराजाओंके राजा श्रीरामभद्रका मंगल हो
जो ब्रह्मा आदि देवताओंके सेव्य हैं, ब्रह्मण्य (ब्राह्मणों और वेदोंकी रक्षा करनेवाले) हैं, श्रीजानकीजीके प्राणनाथ हैं, उन रघुकुलके नाथ श्रीरामभद्रका मंगल हो
जो श्रीसम्पन्न सुन्दर आकारवाले जामाता मुनिकी कृपासे हमलोगोंको प्राप्त हुए हैं, उन मेरे महान् प्रभु रघुनाथजीका मंगल हो
मेरे आचार्य जिनमें मुख्य हैं, उन अर्वाचीन आचार्यों तथा सम्पूर्ण प्राचीन आचार्योंने मंगलाशासनमें परायण होकर जिनका सत्कार किया है, उन श्रीरामभद्रका मंगल हो
जामातामुनिने इस सुन्दर मंगलाशासनका निर्माण किया है। इससे प्रसन्न होकर तीनों लोकोंके पति श्रीमान् रामभद्र सदा ही मंगल करें
इति श्रीवरवरमुनिस्वामिकृतश्रीराममङ्गलाशासनं सम्पूर्णम्।
More scriptures