SANATANI
Brahmananda Paramahamsa Swami · Ashtakam · 9 verses
जिन परमात्मासे यह ब्रह्मा आदिरूप जगत् प्रकट होता है और सम्पूर्ण जगत्के कारणभूत जिस परमेश्वरमें यह समस्त संसार स्थित है तथा अन्तकालमें यह समस्त जगत् जिनमें लीन हो जाता है—वे दीनबन्धु भगवान् आज मेरे नेत्रोंके समक्ष दर्शन दें
जिनके करकमलमें सूर्यके समान प्रकाशमान चक्र, भारी गदा और श्रेष्ठ शंख शोभित हो रहा है, जो पक्षिराज (गरुड़) की पीठपर अपने चरणकमल रखे हुए हैं, वे दीनबन्धु भगवान् आज मुझे प्रत्यक्ष दर्शन दें
जिन्होंने जलमें डूबी हुई पृथ्वीका उद्धार किया, नग्न की जाती हुई पाण्डववधू (द्रौपदी) को वस्त्रोंसे ढक लिया और ग्राहके मुखसे गजराजको बचा लिया—वे दीनबन्धु भगवान् आज मेरे नेत्रोंके समक्ष हो जायँ
जिनकी स्नेहदृष्टिसे देखे जानेके कारण देवतालोग ऐश्वर्य पाते हैं और कोपदृष्टिके द्वारा देखे जानेसे दानवलोग नष्ट हो जाते हैं तथा सूर्य, यम और वायु आदि जिनके भयसे भीत होकर अपने-अपने कार्योंमें प्रवृत्त होते हैं, वे दीनबन्धु भगवान् आज मेरे नेत्रोंके सामने हो जायँ
सामवेदके गानमें चतुरलोग यज्ञोंमें जिन अजन्मा भगवान्के गुणोंको गाते हैं, धीर बुद्धिवाले संन्यासीलोग एकान्तमें जिनका ध्यान करते हैं और योगीजन अपने शरीरके भीतर पुरुषरूपसे जिनका साक्षात्कार करते हैं, वे दीनबन्धु भगवान् आज मेरे नेत्रोंके सामने हों
जो भगवान् आकार, रूप और गुणके सम्बन्धसे रहित होकर भी भक्तोंके ऊपर दया करनेके निमित्त अवतार धारण करते हैं और जो सर्वत्र विद्यमान रहते हुए भी शेषनागके शरीरको अपनी शय्या बनाये हुए हैं, वे दीनबन्धु भगवान् आज मेरे नेत्रोंके प्रत्यक्ष हों
आलस्यहीन मुनिवरोंका समूह संसारके दुःखरूपी दावानलकी जलन शान्त करनेके लिये जिन भगवान्के चरणकमलकी आराधना करता है, वे समस्त जगत्के आत्मभूत दीनबन्धु मेरे सब अपराधोंको भूलकर आज मेरे नेत्रोंके समक्ष दर्शन दें
जिन भगवान्के नामकीर्तनमें तत्पर चाण्डाल भी निश्चय ही सम्पूर्ण कलिमल (पाप)को त्यागकर जगत्को पवित्र कर देता है, वे दीनबन्धु भगवान् मेरे समस्त पापको अपनी करुणादृष्टिसे जलाकर आज मेरे नेत्रोंको प्रत्यक्ष दर्शन दें
जो लोग ब्रह्मानन्दके कहे हुए इस दीनबन्ध्वष्टक नामक पवित्र स्तोत्रका नित्य संयतचित्तसे पाठ करेंगे उनके ऊपर विष्णुभगवान् प्रसन्न रहेंगे
इति श्रीमत्परमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीदीनबन्ध्वष्टकं सम्पूर्णम्।
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