SANATANI
Vyasa · Stotra · 6 verses
हे वरदायिनी देवि! हे भगवति! तुम्हारी जय हो। हे पापोंको नष्ट करनेवाली और अनन्त फल देनेवाली देवि! तुम्हारी जय हो! हे शुम्भ-निशुम्भके मुण्डोंको धारण करनेवाली देवि! तुम्हारी जय हो। हे मनुष्योंकी पीड़ा हरनेवाली देवि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ
हे सूर्य-चन्द्रमारूपी नेत्रोंको धारण करनेवाली! तुम्हारी जय हो। हे अग्निके समान देदीप्यमान मुखसे शोभित होनेवाली! तुम्हारी जय हो। हे भैरव-शरीरमें लीन रहनेवाली और अन्धकासुरका शोषण करनेवाली देवि! तुम्हारी जय हो, जय हो
हे महिषासुरका मर्दन करनेवाली, शूलधारिणी और लोकके समस्त पापोंको दूर करनेवाली भगवति! तुम्हारी जय हो। ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य और इन्द्रसे नमस्कृत होनेवाली हे देवि! तुम्हारी जय हो, जय हो
सशस्त्र शंकर और कार्तिकेयजीके द्वारा वन्दित होनेवाली देवि! तुम्हारी जय हो। शिवके द्वारा प्रशंसित एवं सागरमें मिलनेवाली गंगारूपिणी देवि! तुम्हारी जय हो। दु:ख और दरिद्रताका नाश तथा पुत्र-कलत्रकी वृद्धि करनेवाली हे देवि! तुम्हारी जय हो, जय हो
हे देवि! तुम्हारी जय हो। तुम समस्त शरीरोंको धारण करनेवाली, स्वर्गलोकका दर्शन करानेवाली और दु:खहारिणी हो। हे व्याधिनाशिनी देवि! तुम्हारी जय हो। मोक्ष तुम्हारे करतलगत है, हे मनोवांछित फल देनेवाली अष्ट सिद्धियोंसे सम्पन्न परा देवि! तुम्हारी जय हो
जो कहीं भी रहकर पवित्र भावसे नियमपूर्वक इस व्यासकृत स्तोत्रका पाठ करता है अथवा शुद्ध भावसे घरपर ही पाठ करता है, उसके ऊपर भगवती सदा ही प्रसन्न रहती हैं
इति व्यासकृतं श्रीभगवतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।
More scriptures