SANATANI
Swami Ramananda · Stotra · 11 verses
हे शिव! हे हरे, हे शिव, हे राम, हे सखे! हे प्रभो, हे त्रिविध तापनिवारण विभो! हे अज, हे जगन्नाथ, हे यादव! मेरी रक्षा करो; हे शिव! हे हरे! मेरी कल्याणमय विजय करो
हे कमललोचन दयानिधे राम! हे हर! हे गुरो! हे गजरक्षक! हे गोपते! हे कल्याण-रूपधारी भव! हे शंकर! मेरी रक्षा करो; हे शिव! हे हरे! मेरा उत्तम विजय-साधन करो
हे सज्जन-मनरंजन! जो पुरुष तुम्हारे मंगलमन्दिर (शिव और विष्णुरूप) परमपदका आश्रय लेते हैं, उन्हें परम दिव्य सुख प्राप्त होता है; अतएव हे शिव! हे हरे! मेरा वर विजय-साधन करो
हे युधिष्ठिरके प्रियतम! हे भूपते! आप विजयी हों। हे पुण्यमहासागरके उपार्जन करनेवाले! आपकी जय हो, जय हो; हे दयामय कृष्ण! आपकी जय हो, आपको नमस्कार है; हे शिव! हे हरे! आप मेरी कल्याणमय विजय करें
हे भवभयहारी माधव! हे लक्ष्मीपते! हे सुकवि-मानस-हंस! हे पार्वतीप्रिय! हे जानकीजीवन राघव! मेरी रक्षा करो, हे शिव! हे हरे! मेरा वर विजयसम्पादन करो
हे भूमिमण्डलके मंगलस्वरूप! हे श्रीपते! हे घनश्याम सुन्दर! हे राम! हे रमापते! हे वेदवर्णित गुण-सागर! हे गोपते! हे शिव! हे हरे! मेरी कल्याणमय विजय करो
हे पतितपावन! तुम्हारा नाम कल्पलता है, तुम्हारा यश नित्य सर्वत्र गाया जाता है तथापि हे माधव! तुम मेरी उपेक्षा क्यों कर रहे हो ? हे शिव! हे हरे! मेरा शुभ विजय-साधन करो
हे देवोंमें श्रेष्ठ देव! हे दयासागर रमापते! सर्वत्र विजय पानेवाले तुझ परमेश्वरके नामरूपी धनका आदर्श कोष मेरे पास किस प्रकार संचित हो जायगा? हे शिव! हे हरे! मेरा परम विजय-साधन करो
हे हनुमत्प्रिय! हे चापधारी प्रभो! हे शीशपर गंगाजीको धारण करनेवाले गुरुदेव! हे विभो! तुम क्यों मुझे भूल गये ? हे शिव! हे हरे! मेरा परम जय-साधन करो
जो मनुष्य इस लोकप्रिय सुन्दर रामानन्द स्वामीके विरचित शिवराम-स्तवका पाठ करता है, वह राम-रमाके चरणकमलोंमें प्रवेश करनेमें समर्थ होता है। हे शिव! हे शिव! हे हरे! मेरा श्रेष्ठ विजय-साधन करो
जो प्रातःकाल उठकर एकाग्रचित्तसे इस शिवरामस्तोत्रका पाठ करता है, उसकी सर्वत्र जय होती है और वह अपने आराध्यदेव विष्णुको प्राप्त होता है
इति श्रीरामानन्दस्वामिना विरचितं श्रीशिवरामाष्टकं सम्पूर्णम्।
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