SANATANI
Adi Shankaracharya · Stotra · 5 verses
जो उदय होते हुए सहस्रकोटि सूर्योंके सदृश आभावाली हैं, केयूर और हार आदि आभूषणोंसे भव्य प्रतीत होती हैं, बिम्बाफलके समान अरुण ओठोंवाली हैं, मधुर मुसकानयुक्त दन्तावलिसे जो सुन्दरी मालूम होती हैं तथा पीताम्बरसे अलंकृता हैं; ब्रह्मा, विष्णु आदि देवनायकोंसे सेवित चरणोंवाली उन तत्त्वस्वरूपिणी कल्याणकारिणी करुणावरुणालया श्रीमीनाक्षीदेवीका मैं निरन्तर वन्दन करता हूँ
जो मोतीकी लडि़योंसे सुशोभित मुकुट धारण किये सुन्दर मालूम होती हैं, जिनके मुखकी प्रभा पूर्णचन्द्रके समान है, जो झनकारते हुए नूपुर (पायजेब), किंकिणी (करधनी) तथा अनेकों मणियाँ धारण किये हुए हैं, कमलकी-सी आभासे भासित होनेवाली, सबको अभीष्ट फल देनेवाली, सरस्वती और लक्ष्मी आदिसे सेविता उन गिरिराजनन्दिनी करुणावरुणालया श्रीमीनाक्षीदेवीका मैं निरन्तर वन्दन करता हूँ
जो श्रीविद्या हैं, भगवान् शंकरके वामभागमें विराजमान हैं, ‘हृं’ बीजमन्त्रसे सुशोभिता हैं, श्रीचक्रांकित विन्दुके मध्यमें निवास करती हैं तथा देवसभाकी अधिनेत्री हैं, उन श्रीस्वामी कार्तिकेय और गणेशजीकी माता जगन्मोहिनी करुणावरुणालया श्रीमीनाक्षीदेवीका मैं निरन्तर वन्दन करता हूँ
जो अति सुन्दर स्वामिनी हैं, भयहारिणी हैं, ज्ञानप्रदायिनी हैं, निर्मला और श्यामला हैं, कमलासन श्रीब्रह्माजीद्वारा जिनके चरणकमल पूजे गये हैं तथा श्रीनारायण (कृष्णचन्द्र) की जो अनुजा (छोटी बहन) हैं; वीणा, वेणु, मृदंगादि वाद्योंकी रसिका उन विचित्र लीलाविहारिणी करुणावरुणालया श्रीमीनाक्षीदेवीका मैं निरन्तर वन्दन करता हूँ
जो अनेकों योगिजन और मुनीश्वरोंके हृदयमें निवास करनेवाली तथा नाना प्रकारके पदार्थोंकी प्राप्ति करानेवाली हैं, जिनके चरणयुगल विचित्र पुष्पोंसे सुशोभित हो रहे हैं, जो श्रीनारायणसे पूजिता हैं तथा जो नादब्रह्ममयी, परेसे भी परे और नाना पदार्थोंकी तत्त्वस्वरूपा हैं, उन करुणावरुणालया श्रीमीनाक्षीदेवीका मैं निरन्तर वन्दन करता हूँ
इति श्रीमच्छङ्कराचार्यकृतं मीनाक्षीपञ्चरत्नं सम्पूर्णम्।
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