SANATANI
Shri Jayadeva · Stotra · 9 verses
लक्ष्मीजीके कुचकुम्भोंका आश्रय करनेवाले, कुण्डलधारी और अति मनोहर वनमालाधारी हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
सूर्यमण्डलको सुशोभित करनेवाले, भवभयके नाशक और मुनियोंके मनरूप सरोवरके हंस हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
कालियनागका दमन करनेवाले, भक्तोंको आनन्दित करनेवाले एवं यदुकुलकमलदिवाकर हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
मधु, मुर और नरकासुरके संहारकर्ता, गरुडवाहन, देवताओंकी क्रीडाके आश्रय हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
निर्मल कमलदलके समान नेत्रोंवाले, भवबन्धनको काटनेवाले एवं त्रिभुवनके आश्रयभूत हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
सीताके साथ शोभा पानेवाले, दूषण दैत्यको जीतनेवाले और युद्धमें रावणको मारनेवाले हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
नवीन मेघके समान श्यामसुन्दर, मन्दराचलको धारण करनेवाले और लक्ष्मीजीके मुखचन्द्रके लिये चकोररूप हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
आपके चरणोंकी हम शरण लेते हैं, आप भी इधर दयादृष्टि कीजिये और हम शरणागतोंका कल्याण कीजिये। हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
इस प्रकार श्रीजयदेव कविका बनाया हुआ यह मंगलमय मधुर गीत भक्तोंको आनन्द देनेवाला है। हे देव! हे हरे! आपकी जय हो, जय हो
इति श्रीजयदेवविरचितं मङ्गलगीतं सम्पूर्णम्।
More scriptures