SANATANI
Chintamani · Stotra · 8 verses
भज गौरीशं भज गौरीशं गौरीशं भज मन्दमते।
हे मन्दबुद्धिवाले! तू सदा गौरीश (शंकरभगवान्) का भजन कर। संसाररूप दुस्तर सागरसे पार लगानेवाले, भगवान् शिवके ही चरणका ध्यान कर, संसारसे उद्धार पानेका दूसरा कोई उपाय ही नहीं है; यह सत्य जान; सदा शंकरके नामका ही गान किया कर। हे मन्दमते! सदा गौरीपति भगवान् शिवको भज
स्त्री, सन्तान, क्षेत्र, धन, शरीर और गृह—ये सब अनित्य हैं, गर्भविकारके परिणामभूत इस संसारको सारहीन तथा स्वप्नवत् असत्य समझकर सबकी उपेक्षा कर दे; हे मन्दमते! सदा गौरीपति भगवान् शिवको भज
मलभूत संसारके रूपपर मोहित होनेसे पुनः संसारमें लौटना पड़ता है, फिर माताके गर्भसे उत्पत्ति होती है, अतः पुनः आशासे व्याकुल हुए अपने चित्तसे तू कह दे कि रे चित्त! क्यों नहीं इस पेटकी चिन्ताको छोड़ता है ? और हे मन्दमते! तू सदा गौरीपति भगवान् शिवको भज
अरे, यह सारा प्रपंच मायासे कल्पित इन्द्रजाल है, इसका विकार प्रत्यक्ष देखा गया है, इसे कदापि सत्य न जान, तत्त्वज्ञान हो जानेपर सब कुछ असार ही ठहरता है, इसलिये विषयोपभोगका विचार कभी न कर; हे मन्दमते! सदा गौरीपति भगवान् शिवको भज
जैसे रज्जुमें भ्रमसे सर्पका आरोप होता है, उसी प्रकार शुद्ध ब्रह्ममें जगत्का आरोपमात्र है, यह माया-मोहका विकार असत्य है, इस बातको तू बारम्बार मनमें विचार। हे मन्दमते! सदा गौरीपति भगवान् शिवको भज
लोग करोड़ों यज्ञ करते हैं, स्नानार्थ गंगाजी जाते हैं, इन्द्रियोंको दमन करनेवाला योग करते हैं, परन्तु यह सबका सिद्धान्तमत है कि ज्ञानहीन जीव सैकड़ों जन्ममें भी मुक्त नहीं हो सकता; इसलिये हे मन्दमते! तू सदा गौरीपति भगवान् शिवका भजन कर
जब सम्पूर्ण इन्द्रियाँ विषयोंसे निवृत्त होकर आत्मामें लीन हो जाती हैं उस समय ऐसा भान होने लगता है कि मैं ही वह परमात्मा हूँ, मैं शुद्ध ब्रह्म ही हूँ तथा इन पंचभूतोंसे पृथक् शुद्ध अद्वैत आनन्दस्वरूप हूँ; हे मन्दमते! सदा गौरीपति भगवान् शिवका भजन कर
हे शिवके सेवक! तू चिन्ता न कर, क्योंकि जो पुरुष चिन्तामणिद्वारा रचित इस गौरीशाष्टकस्तोत्रका शुद्ध भक्तिसे नित्य पाठ करता है, वह ब्रह्ममें लीन हो जाता है, यह सत्य बात है; इसलिये हे मन्दमते! तू सदा गौरीपति भगवान् शिवको भज
इति श्रीचिन्तामणिविरचितं गौरीशाष्टकं सम्पूर्णम्।
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