SANATANI
Shri Madhvacharya (Attributed) · Stotra · 5 verses
हे प्रवरानदीतीरवासिनी, वेदोंसे प्रतिपादित, क्षीरसागरविहारिणी, नारायणप्रिया, मनोहारिणी, संसारकी सार और आधाररूपिणी, लक्ष्मी और विद्यास्वरूपिणी, शरणागतकी रक्षामें तत्पर, मुनिगणोंसे आराधित हे देवि!
तुम्हारी जय हो! जय हो! हे मनोहर रूपवाली! तुम्हारी जय हो! हे मात:! इस संसारकूपमें पड़े हुए मेरा उद्धार करो
पूर्णचन्द्रके समान दिव्य मुखवाली, कुन्दपुष्पके-से स्वच्छ दाँतोंवाली, अपने पैरोंकी नख-ज्योतिसे मदनको पराजित करनेवाली, मधुकैटभका संहार करनेवाली, प्रफुल्लित कमल-समान नेत्रोंवाली, शेषशायिनी, गरुडवाहिनी, दुराराध्या, संकटवनको भस्म करनेवाली (हे देवि! तुम्हारी जय हो! जय हो!)
चरणोंमें नूपुर धारण करनेवाली, मणि और मोतियोंके आभूषण धारण करनेवाली, चोली और वस्त्रोंसे सुसज्जित, कमलमुखी, इन्द्रके विघ्न-बाधाओंको दूर करनेवाली, ब्राह्मणोंके लिये आनन्ददायिनी, गज और ग्राहका उद्धार करनेवाली हे देवि! मुझ शरणागतपर कृपा करो। (हे देवि! तुम्हारी जय हो! जय हो!)
तुम राहुकी ग्रीवा काटकर देवोंकी रक्षा करती हो, असुरोंको उनकी इच्छाके विपरीत मृत्यु और देवताओंको अमृत देती हो, युद्धकुशल और वीर दैत्योंसे रण-क्रीडा करानेवाली हो। हे मध्वमुनीश्वरको वर देनेवाली! भक्तोंका पालन करो। (हे देवि! तुम्हारी जय हो! जय हो!)
इति देव्या आरात्रिकं समाप्तम्।
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