SANATANI
Shri Vitthaleshvara · Stotra · 4 verses
सबके आत्मारूपसे व्याप्त, भगवान् व्रजराज श्रीकृष्णका ही सदैव भजन करना चाहिये, वे ही हमलोगोंके लौकिक और पारलौकिक लाभ सिद्ध करेंगे
दूसरेका आश्रय नहीं लेना चाहिये, क्योंकि वह सर्वथा बाधक होता है; सदा स्वावलम्बी होकर, सब तरहसे आत्मभावका पालन करना चाहिये
कालादि दोषोंको दूर करनेवाले भगवान् कृष्णका सदा-सर्वथा सेवन करना चाहिये और दोष-दृष्टिको त्यागकर, श्रद्धापूर्वक उनके भक्तोंका संग करना चाहिये
भगवान् कृष्णमें ही सदैव अपने मनको लगाये रखना चाहिये; क्योंकि उनके भक्तोंको यह कठिन काल भी बाधा नहीं पहुँचा सकता
इति श्रीविट्ठलेश्वरोक्ता (द्वितीया) चतुःश्लोकी समाप्ता।
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