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Shri Hanuman Chalisa Full Devanagari Scripture Text and Path | Sanatani
ॐ
श्रीहनुमानचालीसा
Goswami Tulsidas · Bhakti · 43 verses
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु,
जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके,
सुमिरौं पवन कुमार ।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं,
हरहु कलेस बिकार ॥
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
1
राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥
2
महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥
3
कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
4
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
5
संकर सुवन केसरीनंदन ।
तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
6
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥
7
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥
8
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
9
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचंद्र के काज सँवारे ॥
10
लाय सजीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥
11
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥
12
सहस बदन तुम्हरो जस गावें ।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावें ॥
13
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥
14
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
15
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।
राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥
16
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना ।
लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥
17
जुग सहस्र जोजन पर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
18
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
19
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
20
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
21
सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डर ना ॥
22
आपन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
23
भूत पिसाच निकट नहीं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥
24
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
25
संकट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥
26
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥
27
और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोइ अमित जीवन फल पावै ॥
28
चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
29
साधु संत के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ॥
30
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥
31
राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥
32
तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
33
अंत काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥
34
और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥
35
संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥
36
जै जै जै हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥
37
जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बंदि महा सुख होई ॥
38
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
39
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥
40
दोहा
पवनतनय संकट हरन,
मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित,
हृदय बसहु सुर भूप ॥
॥ इति श्रीहनुमानचालीसा सम्पूर्णम् ॥
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