SANATANI
Traditional · Vandana · 8 verses
उन गजवदन देवदेवकी जय हो, जिनके चरणकमलका स्मरण सम्पूर्ण विघ्नसमूहको इस प्रकार नष्ट कर देता है जैसे सूर्य अन्धकारराशिको॥
जो पुरुष , विवाह, गृहप्रवेश, (घरसे बाहर जाने), संग्राम अथवा संकटके समय , एकदन्त, कपिल, गजकर्ण, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशन, विनायक, धूम्रकेतु, , भालचन्द्र और गजानन—इन बारह नामोंका पाठ या श्रवण भी करता है, उसे किसी प्रकारका विघ्न नहीं होता॥2, 3, 4
जो श्वेत वस्त्र धारण किये हैं, चन्द्रमाके समान जिनका वर्ण है तथा जो प्रसन्नवदन हैं, उन देवदेव चतुर्भुज भगवान् विष्णुका सब विघ्नोंकी लिये ध्यान करना चाहिये॥
जो वसिष्ठजीके नाती (), शक्तिके पौत्र, पराशरजीके पुत्र तथा शुकदेवजीके पिता हैं, उन निष्पाप, व्यासजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥
विष्णुरूप व्यास अथवा व्यासरूप श्रीविष्णुको मैं नमस्कार करता हूँ। वसिष्ठवंशज ब्रह्मनिधि श्रीव्यासजीको बारम्बार नमस्कार है॥
भगवान् वेदव्यासजी बिना चार मुखके ब्रह्मा हैं, दो भुजावाले दूसरे विष्णु हैं और ललाटलोचन (तीसरे नेत्र) से रहित साक्षात् महादेवजी हैं॥
इति मङ्गलं सम्पूर्णम्।
More scriptures