खुड्डी उकड़ू_बैठना नित्यक्रिया शौच

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पहले सब वही पोस्चर यूज करते थे..

 

गरीब भी और अमीर भी। हाँ किसी किताब विशेष में किसी खास तरीके की हिदायत दी गई हो तो मुझे नहीं मालूम।

 

सुबह हो या शाम या फिर कोई और समय…. अकेले हो या समूह में पोस्चर यही रहता था।

 

कारण था इसका… क्योंकि यही सबसे वैज्ञानिक और तर्क संगत पोस्चर है इस काम के लिए।

 

मगर हमें तो पश्चिमी जगत के पीछे भागने का शौंक है। इसलिए इस मामले में भी हम पाश्चात्य जगत का ही अनुशरण करने में अपनी बड़ाई समझने लगे और बाकी मामलों की तरह यहां भी अपना ही नुकसान किया।

 

नित्यकर्म से निवृत होने के लिए ‘स्क्वाट पोजीशन’ से बेहतर कुछ नहीं। हिंदी में इसको ‘उकड़ू बैठना’ कहते हैं।

 

इस प्रकार बैठकर मलत्याग करते समय पैरों और घुटनों से पेट पर एक प्रेसर बनता है और जिसके फलस्वरूप रेक्टम पूरी तरह खाली हो जाता है।

 

अगर रेक्टम पूरी तरह खाली नहीं होगा तो उसमें रुका अपशिष्ट पदार्थ वहां सड़न पैदा करेगा जो अंत में कोलन कैंसर, अपेंडिसाइटिस और इन्फ्लामेट्री बाउल डिजीज को जन्म देगा।

 

स्क्वाट पोजीशन में बैठकर मलत्याग करने से बवासीर होने के चांसेज नगण्य हो जाते हैं और गर्भवती महिल

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