अथर्ववेद पहला खंड सूक्त 5

हे जलो ! क्योंकि आप संपूर्ण सुख के सागर हो इसलिए हमें सुख उपयोग करने , रमणीय तत्वों के दर्शन अभिलाषी बनने तथा ब्रह्मा से साक्षात्कार परिपुष्ट कीजिए |   … Read More

अथर्ववेद पहला खंड सूक्त 4

यज्ञ करता व्यक्ति माता और बहन के समान जल , सोमरस ,होमद्रव्य , दूध , को अपने मार्ग से लेकर यज्ञ में सम्मिलित होते हैं | सूरज इस जल के … Read More

अथर्ववेद पहला खंड सूक्त 2

सभी जड़ चेतना का धारण पोषण करने वाला पर्जनय इस बाण का पिता है | इस बात को हम जानते हैं तथा सभी तत्वों से युक्त धरती इसकी माता है … Read More

अथर्ववेद पहला खंड सूक्त 1

जब चेतन सभी में 3 गुना 7 ( 21 ) देवता चारों ओर घूमते रहते हैं | वाणी के स्वामी ब्रह्माजी , उनकी चमत्कारी शक्ति को आज मुझे दें | … Read More